आजादी के 61 वर्ष बाद व्यापार
निवेशकों का भारत के प्रति बढ़ता मोह, विकसित देशों से होने वाले करार आदि सिद्ध करते हैं कि हमारा भारत देश 'सोने की चिड़िया' कल भी था और आज भी है।
View Articleमेरा भारत महान?
स्वतंत्रता का मतलब है जो हम अपने लिए नहीं चाहते वह दूसरों के लिए भी न करें। जातिगत आधार पर आरक्षण का ही मुद्दा लें।
View Articleआजादी दिवस पर दोनों पंजाबों में गूँजेगा संगीत
भारत-पाक बँटवारे के समय जो दोनों मुल्कों को दर्द झेलना पड़ा था, उसको तो भुलाया ही नहीं जा सकता, उस दिन दोनों देश आज़ाद तो हो गए पर दोनों मुल्कों में नफरत का पौधा ऐसा बढ़ना-फूलना शुरू हुआ
View Articleभारतीय महिला : तेजी से बढ़ते कदम
इंडियन वूमन अर्थात भारतीय महिला- इस शब्द को सुनते ही हर नागरिक के मन में एक छवि उभरने लगती है। भारतीय महिला अर्थात एक अच्छी बेटी, बहन, माँ, पत्नी इत्यादि। स्वतंत्रता के इन 61 वर्ष पश्चात भी हम महिलाओं...
View Articleआर्थिक आजादी का अर्थ है हर व्यक्ति का आर्थिक उत्थान
स्वराज्य की मेरी धारणा के बारे में किसी को कोई भ्रम न रहे। वह है बाहरी नियंत्रण से पूर्ण स्वाधीनता और पूर्ण आर्थिक स्वाधीनता। इस प्रकार, एक छोर पर है राजनीतिक स्वाधीनता, और दूसरे पर आर्थिक। इसके दो छोर...
View Articleबैंक राष्ट्रीयकरण से बदली थी तस्वीर
मध्यप्रदेश ही नहीं, पूरे देश में आर्थिक विकास या आर्थिक आजादी का दौर वास्तव में 1969 से प्रारंभ हुआ, जब संसद ने राजाओं-नवाबों के प्रिवीयर्स एवं विशेषाधिकार की समाप्ति और बैंकों के राष्ट्रीयकरण का...
View Articleकिसानों को आत्मनिर्भर बनाना होगा
स्वतंत्रता इस मूल अवधारणा पर आधारित है कि व्यक्ति अपनी भावना को सही अभिव्यक्ति दे सके और अपनी आजीविका को सुचारु रूप से चला सके। धर्म की अवधारणा भी इसी पर आधारित है कि किसी और के काम में हस्तक्षेप किए...
View Articleभारत में समृद्धि फैलेगी, खुशहाली नहीं!
स्वतंत्रता की 61वीं जयंती मनाते हुए हम इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि धीरे-धीरे देश में समृद्धि फैलती जा रही है। इस बात के बावजूद कि हमारी अर्थव्यवस्था पाँच साल में पहली बार मंदी की शिकार हुई है, तथ्य...
View Articleआर्थिक क्षेत्र में रफ्तार के साथ संतुलन भी हो
आज हम ऐसे दौर में पहुँच चुके हैं जहाँ पूरी दुनिया में बाजारवादी आर्थिक नीतियों का ही बोलबाला है। इस दौर में उदारीकरण या ग्लोबलाइजेशन से डरने से काम नहीं चलेगा। दुनिया जिस तरफ जा रही है उसकी अनदेखी करना...
View Articleसमृद्धि की 'रिसन' के इंतजार में गाँधी का अंतिम आदमी
गाँधी ने आर्थिक प्रगति का मानक सबसे आखिरी आदमी को माना था। इस आखिरी आदमी की खुशहाली ही उनके लिए प्रगति का बुनियादी और अंतिम लक्ष्य था। वे इसी आदमी के आँसू पोंछने की बात करते थे। वे जिस तरह के अर्थतंत्र...
View Articleउभर रहा है भारतीय अर्थव्यवस्था का नवस्वरूप
हमारा देश आज विश्व में एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में मान्यता प्राप्त कर गया है। इसके चार प्रमुख कारण हैं : बढ़ती विकास दर, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी, गरीबी प्रतिशत में निरंतर गिरावट तथा आम आदमी के...
View Articleलघु वित्त संस्थाओं की बड़ी उपलब्धि
अंबानी, मित्तल, टाटा आदि के नाम तो अक्सर अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में छाए रहते हैं लेकिन हाल ही में भारत की लघु वित्त संस्थाओं के नाम भी 'फोर्ब्स' पत्रिका में आए हैं। इसमें विश्व की 50 शीर्ष लघु वित्त...
View Article'ग्रामवासिनी' से 'नगरवासिनी' हुई भारत माता!
आजादी के बाद से ही भारतीय समाज के केंद्र पर नजर डालने से यह तस्वीर उभरकर आती है कि भारतमाता 'ग्रामवासिनी' की जगह भारतमाता 'नगरवासिनी' ने ले ली है । शहर ने गाँवों के सपने की जगह ले ली और राष्ट्रीय...
View Articleबहुत देर कर दी मेहरबाँ आते-आते
नियोजित विकास में पहली चूक तो यह हुई कि योजनाएँ बनाते समय आदिवासी प्रकृति और शासन-प्रशासन की प्रवृत्ति का सही आकलन नहीं किया गया। यानी गाड़ी शुरुआत में ही पटरी से उतरकर अलग दिशा में अनुपयुक्त मार्ग पर...
View Articleमहिला सशक्तीकरण जरूरी
आजादी के इतने सालों बाद जब अपने देश को देखती हूँ तो लगता है हम काफी ऊँचाइयों पर पहुँच गए हैं। बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें, तेज दौड़ती गाड़ियाँ और लोगों की बढ़ती आय से यह जाहिर है कि भारत ने बहुत तरक्की की है; यह...
View Articleमहिलाएँ और आर्थिक आजादी
आँकड़ों के ढेर में बैठकर इस बात की कल्पना करना काफी आसान है कि देश की आर्थिक प्रगति कैसे हो रही है। सभी दूर भारत के आधुनिक चेहरों को दिखाया जा रहा है। ऐसा चेहरा जिसमें प्रगति की चमक है और विकास की...
View Articleमस्ती की पाठशाला में बिंदास जीवन!
वैभव जब भी शर्ट खरीदने जाता है तो एक शर्ट ही नहीं खरीदता। पसंद आने पर वह कई शर्ट खरीद सकता है। चाहे उनकी संख्या चार हो या छः। उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह आठ सौ के बदले पाँच हजार खर्च कर रहा है। वह जब...
View Article'पद' और 'शिक्षा' से बदला आदिवासियों का जीवन
पश्चिम निमाड़ के आदिवासी बहुल खरगोन और बड़वानी जिले में आदिवासियों की जीवनशैली को पद और शिक्षा ने काफी हद तक बदल डाला है। पैदल और बैलगाड़ी पर सफर करने वाला इस वर्ग का एक बड़ा तबका अब दुपहिया वाहन पर सवार...
View Articleव्यवसाय पर भी एकाधिकार!
21वीं सदी में आ रही आजादी की प्रत्येक वर्षगाँठ देश के विकास हेतु किए गए वादों का मूल्यांकन करने का वाजिब मापदंड भी है। लगभग पिछले 400 वर्षों से वनों की ओर धकेल दिए गए आदिवासी वर्ग का विकास इन वादों की...
View Articleभारतीय अर्थव्यवस्था कुछ तथ्य
फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार भारत में अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अरबपतियों की जनसंख्या की दृष्टि से भारत का नंबर विश्व में चौथा लगता है।
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